भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण का जवाब देते हुए सीमा पार आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर, अल्पसंख्यकों के अधिकार, लोकतंत्र और धार्मिक असहिष्णुता का मुद्दा उठाया। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के बयानों पर भारत की ओर से राइट ऑफ रिप्लाई दिया।
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान पर लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत को अपनी रक्षा करने का अधिकार है और वह इसका इस्तेमाल जारी रखेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के परिणाम होंगे।” उन्होंने महासभा से पाकिस्तान और उसकी नीतियों का आकलन उसके वास्तविक आचरण के आधार पर करने की अपील की।
जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में गहलोत ने कहा कि भारत की स्थिति स्पष्ट है और केंद्र शासित प्रदेश देश का अभिन्न तथा अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भी उठाया और वहां कथित हिंसा, हत्याओं तथा बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने का उल्लेख किया।
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पाकिस्तान के लोकतांत्रिक अधिकारों संबंधी बयानों पर भी भारत ने पलटवार किया। गहलोत ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां सेना की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन का जिक्र करते हुए उसके “वास्तविक शासक” को आजीवन मिली कथित प्रतिरक्षा का भी उल्लेख किया।
धार्मिक असहिष्णुता के मुद्दे पर गहलोत ने पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की स्थिति और ईशनिंदा कानूनों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार से परिचित है।
गहलोत ने पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तानी सेना की प्रमुख अकादमी के नजदीक रह रहा था। भारत की यह प्रतिक्रिया महासभा में पाकिस्तान के बयान के जवाब में औपचारिक राइट ऑफ रिप्लाई के रूप में सामने आई।
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