भारत ने संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान पर झूठे और भ्रामक दावे फैलाने का आरोप लगाया है। भारत की सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा उठाया। वहीं, सांसद प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के कथित आपराधिक कृत्यों पर जवाबदेही तय करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की।
भारत ने पाकिस्तान के दावों का दिया जवाब
न्यूयॉर्क में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की चौथी समिति में उपनिवेशवाद से मुक्ति के विषय पर चर्चा हुई। इस दौरान महिमा कुमारी मेवाड़ ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि के बयान का जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर को लेकर भ्रामक बातें फैलाने के लिए कर रहा है।
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उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों के कथित गंभीर उल्लंघन पर चिंता जताई। उनके अनुसार, वहां के नागरिक सैन्य नियंत्रण, दमन और संसाधनों के दोहन के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बुनियादी अधिकारों, स्वतंत्रता और आवश्यक सुविधाओं की मांग करने वाले कई निर्दोष नागरिकों की हाल के महीनों में हत्या की गई है।
महिमा कुमारी मेवाड़ ने पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सैन्य शासन, चुनावों की निष्पक्षता पर विवाद, निर्वाचित नेताओं की गिरफ्तारी और आतंकवाद को कथित समर्थन देने का उल्लेख किया। भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा हमेशा रहेगा।
संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में सांसद प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मिशन में तैनात विशेषज्ञों के आपराधिक कृत्यों तथा गलत आचरण के मामलों में जवाबदेही मजबूत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे मामलों में शून्य-सहनशीलता की नीति का समर्थन करता है।
प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र और सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने तथा पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित देशों से मामलों की समयबद्ध जांच और आवश्यक होने पर मुकदमा चलाने की अपील की।
93 मामलों का उल्लेख
प्रिया सरोज के अनुसार, 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 के बीच संयुक्त राष्ट्र के कानूनी मामलों के कार्यालय ने 93 अधिकारियों और मिशन विशेषज्ञों से जुड़े मामले जांच और संभावित अभियोजन के लिए उनके राष्ट्रीयता वाले देशों को भेजे।
उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, 2023 और प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 का उल्लेख करते हुए कहा कि जवाबदेही तय करने में राष्ट्रीय कानूनों और उचित कानूनी प्रक्रिया का सम्मान आवश्यक है। उन्होंने यौन शोषण और दुर्व्यवहार के पीड़ितों की सहायता के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों को समर्थन देने की भी बात कही।
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