भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिशों के बीच अमेरिका की नई टैरिफ चेतावनी ने चर्चा तेज कर दी है। इस मुद्दे पर भारत ने कहा कि वह सेक्शन 301 की कार्यवाही के तहत अमेरिका के साथ लगातार संपर्क और बातचीत बनाए हुए है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने भारत सहित 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ जांच पूरी कर ली है। जांच के बाद यूएसटीआर ने उन देशों पर अतिरिक्त 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है, जो कथित रूप से जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लागू करने में विफल रहे हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत समानांतर रूप से अमेरिका के साथ एक रूपरेखा समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भी बातचीत कर रहा है। यह प्रक्रिया 2 फरवरी 2026 की घोषणा और 7 फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान के अनुरूप चल रही है।
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क्या है सेक्शन 301?
ट्रेड एक्ट 1974 का सेक्शन 301 अमेरिकी सरकार के सबसे प्रभावशाली व्यापारिक प्रवर्तन उपकरणों में से एक माना जाता है। इसका उद्देश्य उन विदेशी नीतियों, कार्यों या व्यापारिक प्रथाओं की जांच करना है, जो अमेरिकी व्यापारिक हितों को नुकसान पहुंचाती हैं। इसके तहत यूएसटीआर किसी भी देश के खिलाफ जांच शुरू कर सकता है और आवश्यक होने पर जवाबी कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यूएसटीआर ने 12 मार्च 2026 को 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ जांच शुरू की थी। जांच में दावा किया गया कि सभी 60 अर्थव्यवस्थाएं जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लागू करने में विफल रहीं।
यह मामला भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और अमेरिका इस समय द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। यदि भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है और निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है।
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