पाहलगाम आतंकवादी हमला के बाद, भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत बहु-स्तरीय और समन्वित प्रतिक्रिया शुरू की। इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने हवा, सतह और जलमग्न क्षेत्रों में अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान की रक्षा तैयारियों पर गंभीर दबाव डाला।
नौसेना की तैनाती और रणनीति
भारतीय नौसेना ने समुद्र, हवा और पानी के नीचे व्यापक ब्लॉकेड स्थापित किया। इंडियन एयर फोर्स के लड़ाकू विमानों और P-8I समुद्री निगरानी विमानों ने दुश्मन की हरकतों पर लगातार निगरानी रखी। सतह पर युद्धपोत और फ्रिगेट ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर नियंत्रण किया। जलमग्न क्षेत्रों में चार पनडुब्बियों को गुप्त रूप से तैनात किया गया, जो दुश्मन के लिए अदृश्य लेकिन घातक खतरा थीं।
सतही कार्रवाई समूह और कैरियर बैटल ग्रुप
सतही कार्रवाई समूहों को अग्रिम क्षेत्रों में तैनात किया गया, जिससे भारतीय नौसेना की आक्रामक समुद्री उपस्थिति सुनिश्चित हुई। MARCOS (मरीन कमांडो) को विशेष संचालन के लिए अग्रिम मोर्चों पर भेजा गया। इस तैनाती ने दुश्मन की नौसैनिक गतिविधियों को सीमित कर उन्हें रक्षात्मक स्थिति में मजबूर किया।
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पश्चिमी बेड़े की तैयारी
उप एडमिरल राहुल विलास गोखले के नेतृत्व में पश्चिमी बेड़े ने मिसाइल परीक्षण और हथियार तैनाती में उच्चतम स्तर की तैयारी दिखाई। केवल 96 घंटों में बेड़े ने सभी प्रमुख हथियार प्रणालियों को तैनात कर परिचालन तत्परता सुनिश्चित की।
वीरता और नेतृत्व
कई नौसेना अधिकारियों ने बहादुरी और रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन किया, जिनमें कैप्टन सुरज जेम्स रिवेरा, कैप्टन विकास गर्ग, कमांडर कपिल कुमार, लेफ्टिनेंट कमांडर ऋषभ पुरविया शामिल हैं। इनकी कार्रवाई ने दुश्मन पर निरंतर दबाव बनाए रखा और ऑपरेशन को सफल बनाया।
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