अमेरिका के कंसास राज्य में सरकारी वकीलों ने भारत में जन्मे हरिंदर सिंह की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने के लिए अदालत में याचिका दायर की है। हरिंदर सिंह कंसास के ओलाथे में रहते हैं। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने अपनी पुरानी पहचान छिपाकर और गलत जानकारी देकर पहले स्थायी निवास और बाद में अमेरिकी नागरिकता हासिल की।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 1991 में अमेरिकी आव्रजन विभाग ने उन्हें न्यूयॉर्क के जेएफके हवाई अड्डे पर रोका था। उस समय उन्होंने अपना नाम रशपाल सिंह बताया था। इसके बाद 1995 में अमेरिकी अदालत ने उन्हें देश से निर्वासित करने का आदेश दिया था। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक रिकॉर्ड में उनके अमेरिका छोड़ने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
इसके बाद वर्ष 1996 में उन्होंने हरिंदर सिंह के नाम से अमेरिका में रहने के लिए नया आवेदन किया। आरोप है कि इस आवेदन में उन्होंने अपनी जन्मतिथि, अमेरिका आने की तारीख और अमेरिका में रहने के उद्देश्य समेत कई महत्वपूर्ण जानकारियां बदल दीं। सरकारी पक्ष का कहना है कि उन्होंने अपनी पिछली पहचान और निर्वासन आदेश से जुड़ी जानकारी भी छिपाई।
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अधिकारियों के अनुसार, गलत जानकारी के आधार पर उन्हें पहले स्थायी निवासी का दर्जा मिला और वर्ष 2008 में उन्होंने अमेरिकी नागरिकता हासिल कर ली। नागरिकता प्रक्रिया के दौरान भी उन्होंने अपनी पुरानी पहचान के बारे में जानकारी नहीं दी।
अब अमेरिकी सरकार अदालत से उनकी नागरिकता रद्द करने और नागरिकता प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित करने की मांग कर रही है। मामले में अदालत का अंतिम फैसला अभी बाकी है।
अमेरिका में नागरिकता रद्द करने से जुड़े मामलों को लेकर हाल के वर्षों में सख्ती बढ़ी है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, 20 जनवरी 2025 से अब तक करीब 123 लोगों के खिलाफ नागरिकता रद्द करने के मुकदमे दायर किए जा चुके हैं।
इसी तरह का मामला मई में इलिनॉय निवासी देबाशीष घोष के खिलाफ भी सामने आया था। उन पर भी गलत जानकारी के आधार पर अमेरिकी नागरिकता हासिल करने का आरोप लगाया गया था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नागरिकता प्रक्रिया में धोखाधड़ी पाए जाने पर सरकार कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
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