ईरान में एक और व्यक्ति को फांसी दिए जाने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। ईरानी अधिकारियों ने शनिवार को पुष्टि की कि एरफान कियानी नामक व्यक्ति को मौत की सजा दी गई। उस पर आरोप था कि उसके इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद से संबंध थे और वह इस वर्ष की शुरुआत में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल था।
ईरान की न्यायपालिका के अनुसार, कियानी पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इनमें सुरक्षा बलों पर हमला, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, आगजनी करना और आम जनता में भय फैलाना शामिल है। अदालत ने उसे विदेशी खुफिया एजेंसी के लिए काम करने वाला “भाड़े का एजेंट” करार दिया था। उसकी सजा को ईरान के सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा, जिसके बाद उसे फांसी दी गई।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब देश में हालिया प्रदर्शनों और क्षेत्रीय तनाव के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया हुआ है। जनवरी 2026 में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद ईरान ने जासूसी और असंतोष से जुड़े मामलों में तेजी से कार्रवाई की है। ईरानी सरकार का दावा है कि देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों, विशेषकर इजरायल और पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त है।
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हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इन फांसियों पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कई मामलों में सुनवाई बंद दरवाजों के पीछे होती है और आरोपियों को उचित कानूनी सहायता नहीं मिल पाती। हाल के हफ्तों में मोसाद से कथित संबंध रखने वाले कई लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
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