ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की सख्त कार्रवाई तेज हो गई है। ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसेनी एजई ने कहा है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल लोगों के मामलों में त्वरित सुनवाई की जाएगी। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित बयान में उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने किसी को जलाया, सिर कलम किया या आग के हवाले किया है, तो ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया तेजी से पूरी की जानी चाहिए।
इस बीच, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक एक्टिविस्ट समूह ने बुधवार (14 जनवरी 2026) को बताया कि अब तक कम से कम 2,571 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 2,403 प्रदर्शनकारी और 147 सरकारी समर्थक बताए गए हैं। इसके अलावा, 12 बच्चों और नौ ऐसे नागरिकों की भी मौत हुई है, जो कथित तौर पर प्रदर्शनों में शामिल नहीं थे। समूह के अनुसार, 18,100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) संगठन ने इससे भी अधिक आंकड़े जारी करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 3,428 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और 10,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। संगठन ने कहा कि यह आंकड़ा स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालयों से मिली नई सूचनाओं के आधार पर सामने आया है, और वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
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राजनीतिक स्तर पर, ईरान सरकार ने अमेरिका पर सैन्य हस्तक्षेप का बहाना बनाने का आरोप लगाया है। यह आरोप ऐसे समय में लगाया गया है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में कार्रवाई को लेकर “कड़ी कार्रवाई” की धमकी दी थी। गौरतलब है कि 23 जून को ईरान ने कतर स्थित अल-उदीद अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया था, जो मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा बेस है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मुद्रा संकट से शुरू हुए ये विरोध अब सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं।
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