ईरान में हालिया प्रदर्शनों के बाद हालात फिलहाल असहज शांति की ओर लौटते दिख रहे हैं। दिसंबर के अंत में खराब होती अर्थव्यवस्था के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन धीरे-धीरे देश की धार्मिक सत्ता को खुली चुनौती में बदल दिया था, लेकिन कड़े दमन के चलते अब राजधानी तेहरान समेत कहीं भी नए प्रदर्शनों के संकेत नहीं मिल रहे हैं। इस दमन में हजारों लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं।
इसी बीच शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को ईरान के एक वरिष्ठ कट्टरपंथी मौलवी अयातुल्ला अहमद खातमी ने गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा देने की मांग की और सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को धमकी दी। उनके इस उग्र बयान से यह साफ झलकता है कि इस्लामिक गणराज्य के सत्ता प्रतिष्ठान में गुस्सा और सख्ती का माहौल बना हुआ है।
इसके उलट, राष्ट्रपति ट्रंप ने नरम रुख अपनाते हुए ईरान के नेताओं को धन्यवाद दिया कि उन्होंने सैकड़ों गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को फांसी नहीं दी। ट्रंप ने कहा कि 800 से अधिक लोगों को फांसी दी जानी थी, लेकिन इसे रद्द कर दिया गया। फांसी और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या को ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई की “रेड लाइन” बताया है।
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रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनों में अब तक 3,090 लोगों की मौत हो चुकी है, जो दशकों में सबसे बड़ा आंकड़ा बताया जा रहा है। हालांकि ईरानी सरकार ने आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह के हताहतों के आंकड़े जारी नहीं किए हैं।
तेहरान में जनजीवन ऊपर से सामान्य नजर आ रहा है, लेकिन इंटरनेट बंदी अब भी जारी है। वहीं, यूरोप के कई शहरों में निर्वासित ईरानियों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही प्रदर्शनों को फिलहाल दबा दिया गया हो, लेकिन ईरान में असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और इसके क्षेत्रीय असर भी देखने को मिल सकते हैं।
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