ईरान ने साफ कर दिया है कि वह यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) रोकने वाला नहीं है और इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ तनाव लगातार बढ़ रहा है। तेहरान ने संकेत दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है, जबकि अमेरिका इस मुद्दे पर दबाव बनाए हुए है। यह विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जून में 12 दिन चले ईरान-इज़राइल युद्ध के दौरान ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में एक शिखर सम्मेलन के दौरान कहा कि ईरान की ताकत इस बात में है कि वह “महाशक्तियों को ना कह सकता है।” उन्होंने अमेरिका के साथ चल रही परमाणु वार्ताओं के बाद यह बयान दिया। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने ओमान में हुई बातचीत को “एक कदम आगे” बताया, लेकिन अराघची के बयान ने आगे की राह को मुश्किल बताया।
अमेरिका ने दबाव बढ़ाने के लिए विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और युद्धपोतों को मध्य-पूर्व में तैनात किया है। अराघची ने कहा कि पश्चिमी देश ईरान के परमाणु बम से डरते हैं, जबकि ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है। हालांकि, पश्चिमी देशों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का मानना है कि 2003 तक ईरान का परमाणु हथियार कार्यक्रम मौजूद था।
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ईरान फिलहाल 60% तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा है, जो हथियार स्तर 90% से थोड़ा ही कम है। वहीं, ईरानी नेतृत्व का कहना है कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने परमाणु हथियार बनाने पर धार्मिक प्रतिबंध लगाया हुआ है।
अमेरिका-ईरान वार्ता का अगला दौर कब और कहां होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, जबकि ईरान ने चेतावनी दी कि बातचीत के दौरान अमेरिका पहले भी हमला कर चुका है, जिससे भरोसे का संकट बना हुआ है।
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