पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर संयुक्त राज्य अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी नहीं हटाता, तो वह फारस की खाड़ी, ओमान सागर और लाल सागर में आयात-निर्यात पूरी तरह रोक देगा।
ईरान के संयुक्त सैन्य कमान प्रमुख अली अब्दोल्लाही ने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और हितों की रक्षा के लिए पूरी ताकत से कदम उठाएगा। उन्होंने अमेरिकी नाकेबंदी को “युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने की शुरुआत” बताया।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर रोक लगानी शुरू कर दी है, हालांकि उसने अन्य देशों के जहाजों के लिए नौवहन स्वतंत्रता बनाए रखने की बात कही है। इससे क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
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इस बीच मध्यस्थ देशों की कोशिशें जारी हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष विराम को आगे बढ़ाया जाए। रिपोर्ट के अनुसार दोनों पक्षों के बीच अस्थायी सहमति बनने के संकेत मिले हैं ताकि बातचीत का रास्ता खुला रह सके।
ईरान की ओर से कहा गया है कि यदि नाकेबंदी नहीं हटाई गई, तो वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य सहित पूरे क्षेत्र में व्यापार को रोक सकता है। यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
मध्यस्थ देशों के अनुसार, बातचीत में तीन प्रमुख मुद्दे शामिल हैं—ईरान का परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और युद्ध क्षति का मुआवजा।
अंतरराष्ट्रीय नेताओं, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस शामिल हैं, ने आने वाले दिनों में वार्ता दोबारा शुरू होने की संभावना जताई है।
इस संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिससे क्षेत्रीय शांति पर गंभीर संकट बना हुआ है।
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