मध्य पूर्व में शांति प्रयासों पर एक बार फिर अनिश्चितता छा गई है, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। तेहरान और वॉशिंगटन के बीच अस्थायी युद्धविराम 21 अप्रैल को समाप्त होने वाला है, जिससे हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं।
इस बीच इस्लामाबाद में प्रस्तावित दूसरे दौर की मध्यस्थता वार्ता पर भी संशय बना हुआ है। अभी तक इन वार्ताओं के लिए कोई निश्चित समय तय नहीं किया गया है। हालात तब और जटिल हो गए जब ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर दोबारा प्रतिबंध लागू कर दिया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की और होर्मुज़ मुद्दे को वार्ता में बाधा बताया। बताया जा रहा है कि ट्रंप ने इन चिंताओं पर विचार करने की बात कही है।
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पहले खबरें थीं कि अमेरिका के मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर इस्लामाबाद पहुंचकर वार्ता में हिस्सा लेंगे, लेकिन अब तक इस पर कोई स्पष्टता नहीं है।
इस बीच इस्लामाबाद में अमेरिकी सैन्य विमानों की आवाजाही और सुरक्षा इंतजामों में बढ़ोतरी ने अटकलों को और तेज कर दिया है। हालांकि ईरान ने बातचीत को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम और तकनीकी अधिकार किसी भी हालत में समझौते के दायरे में नहीं आएंगे।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने दोहराया कि देश अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी और सख्त होते रुख के कारण कूटनीतिक समाधान की संभावना फिलहाल कमजोर नजर आ रही है।
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