भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मंगलवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ फोन पर बातचीत की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
डॉ. जयशंकर ने जानकारी देते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा, “आज शाम ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ चल रहे संघर्ष के ताजा घटनाक्रम पर विस्तृत बातचीत हुई। हमने संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई है।”
पिछले दो हफ्तों में यह तीसरी बार है जब दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हुई है। इससे पहले 28 फरवरी और 5 मार्च को भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हो चुकी है।
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इस बीच पश्चिम एशिया में हिंसा तेजी से बढ़ रही है। ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे क्षेत्रीय युद्ध की आशंका भी गहराती जा रही है। ईरान ने दावा किया है कि 8 मार्च को लेबनान की राजधानी बेरूत स्थित रामादा होटल पर हुए इजरायली हवाई हमले में उसके चार राजनयिक मारे गए।
वहीं अमेरिका के सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने संकेत दिया है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो अमेरिका ईरान में जमीनी सैनिक भी तैनात कर सकता है।
दूसरी ओर कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने ईरान की आलोचना करते हुए कहा कि पड़ोसी खाड़ी देशों पर हमले रोकने का उसका वादा जमीन पर लागू नहीं हो रहा है।
उधर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने घोषणा की है कि उनका देश कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को ईरानी ड्रोन हमलों से बचाव में मदद के लिए सैन्य विशेषज्ञ भेजने की योजना बना रहा है।
इसी बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने चेतावनी दी है कि ईरान के दुश्मनों से जुड़े किसी भी जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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