क्रेमलिन ने गुरुवार (5 फरवरी, 2026) को कहा कि वह रूस और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर हथियारों पर अंतिम संधि के समाप्त होने पर खेद व्यक्त करता है और इसे एक नकारात्मक कदम बताया। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, "हम इसे नकारात्मक रूप से देखते हैं। इस संबंध में हम अपना खेद व्यक्त करते हैं।"
यह संधि, जिसे न्यू स्टार्ट (New START) संधि कहा जाता है, के तहत दोनों देशों को अपने परमाणु हथियारों की संख्या सीमित करनी होती थी। इस संधि के अंत के बाद अब अमेरिका और रूस के बीच हथियारों की संख्या पर कोई निर्धारित नियंत्रण नहीं रहेगा, जो वैश्विक सुरक्षा और परमाणु संतुलन के लिए चिंताजनक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि न्यू स्टार्ट संधि का अंत परमाणु हथियारों के प्रतिस्पर्धी विकास की राह खोल सकता है और दोनों महाशक्तियों के बीच विश्वास और पारस्परिक सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले ढांचे को कमजोर कर सकता है।
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रूस और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर हथियारों पर नियंत्रण वाली यह अंतिम संधि 2010 में लागू हुई थी और इसे कई बार बढ़ाया गया। इसकी समाप्ति के बाद वैश्विक मंच पर परमाणु हथियारों पर निगरानी और नियंत्रण को लेकर नई चुनौतियां उत्पन्न हो गई हैं।
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