चेक गणराज्य की युवा टेनिस खिलाड़ी लिंडा नोस्कोवा ने विंबलडन में अपना पहला ग्रैंड स्लैम एकल खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। 21 वर्षीय नोस्कोवा ने रोमांचक फाइनल मुकाबले में अपनी हमवतन खिलाड़ी कैरोलीना मुचोवा को हराकर अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की।
सेंटर कोर्ट पर खेले गए फाइनल मुकाबले में नौवीं वरीयता प्राप्त नोस्कोवा ने मुचोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से मात दी। मुकाबला कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा। नोस्कोवा ने पहले सेट में शानदार नियंत्रण दिखाया और दूसरे सेट में भी 6-2, 5-2 की बढ़त बना ली थी, लेकिन मुचोवा ने जबरदस्त वापसी करते हुए लगातार पांच गेम जीतकर मुकाबले को निर्णायक सेट तक पहुंचा दिया।
निर्णायक सेट में नोस्कोवा ने मानसिक मजबूती दिखाई और दबाव के बावजूद शानदार खेल जारी रखा। उन्होंने एक ऐस लगाकर छठा चैंपियनशिप प्वाइंट हासिल किया और फिर सर्विस विनर के साथ मुकाबला अपने नाम कर लिया।
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खिताब जीतने के बाद नोस्कोवा ने कहा कि यह अनुभव बेहद खास है और अंतिम अंक हासिल करना हमेशा कठिन होता है। उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी मुचोवा की भी जमकर तारीफ की और कहा कि उनके खिलाफ पहला मेजर फाइनल खेलना यादगार रहा।
मुचोवा ने भी नोस्कोवा के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने दबाव संभाला और खेल दिखाया, वह शानदार था।
इस जीत के साथ नोस्कोवा ने एक दुर्लभ उपलब्धि भी हासिल की। वह 2005 में वीनस विलियम्स और 2009 में सेरेना विलियम्स के बाद विंबलडन में मैच प्वाइंट बचाकर खिताब जीतने वाली तीसरी महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
नोस्कोवा ने अपनी जीत का श्रेय अपने परिवार को भी दिया। उन्होंने अपनी दिवंगत मां इवाना को याद करते हुए भावुक संदेश दिया और कहा कि उनके बिना वह यहां तक नहीं पहुंच पातीं।
नोस्कोवा की यह जीत चेक महिला टेनिस के लिए भी खास है। वह पिछले चार वर्षों में विंबलडन महिला एकल खिताब जीतने वाली तीसरी चेक खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले मार्केटा वोंद्रोसोवा ने 2023 और बारबोरा क्रेजचिकोवा ने 2024 में यह खिताब जीता था।
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