देश में बाघों की मौत को लेकर सामने आए आंकड़ों में महाराष्ट्र की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली बताई जा रही है। राज्य सरकार ने विधान परिषद में जानकारी दी कि वर्ष 2025 में देशभर में दर्ज 166 बाघ मौतों में से 41 मौतें महाराष्ट्र में हुईं।
यह जानकारी राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान दी। उन्होंने बताया कि ये आंकड़े राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित हैं।
वन मंत्री ने कहा कि हाल ही में नागपुर जिले के पेंच टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत को लेकर सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में यह जानकारी दी गई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बाघों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठा रही है और शिकार रोकने के लिए एंटी-पोचिंग उपायों को और मजबूत किया गया है।
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सरकार के अनुसार जंगलों में निगरानी बढ़ाने, वनकर्मियों की संख्या बढ़ाने और आधुनिक तकनीक का उपयोग करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हालांकि इस मुद्दे पर कई वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि सरकार को बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है। कुछ कार्यकर्ताओं ने तेंदुओं की सुरक्षा से जुड़े नियमों को कमजोर करने के प्रस्ताव का भी विरोध किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की बढ़ती मौतें वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। इसके लिए सरकार, वन विभाग और समाज को मिलकर प्रयास करने होंगे, ताकि देश में बाघों की संख्या और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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