मुंबई के चेम्बुर में अमर महल जंक्शन के पास संताक्रूज़-चेम्बुर फ्लाईओवर के नीचे एक अनोखा स्कूल स्थापित किया गया है, जो शहर के सड़क पर रहने वाले बच्चों के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करता है। इस स्कूल का नाम सिग्नल शाला है और इसे शिपिंग कंटेनरों के माध्यम से संचालित किया जाता है।
यह स्कूल उन बच्चों के लिए है जो मुंबई की सड़कों पर जीवन यापन कर रहे हैं और कई बच्चे कभी कक्षा में नहीं गए हैं। स्कूल का दिन पारंपरिक पाठ्यपुस्तकों से नहीं, बल्कि नहाने, खाने और यूनिफॉर्म पहनने से शुरू होता है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के जीवन में अनुशासन, स्वच्छता और शिक्षा को समान रूप से शामिल करना है।
हर सुबह स्कूल बस चेम्बुर, मांकुर्द और घाटकोपर के मार्ग से लगभग 20 बच्चों को उठाती है, जिनकी उम्र 3 से 15 वर्ष के बीच होती है। ज्यादातर बच्चे सड़क पर रहने वाले परिवारों के हैं। स्कूल में बच्चों को कक्षा के साथ-साथ लैब, खेल के क्षेत्र और व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
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स्कूल का दिन लगभग आठ घंटे तक चलता है, जो सामान्य स्कूल की तुलना में लंबा है। शुरुआत बुनियादी स्वच्छता क्रियाओं से होती है, इसके बाद पढ़ाई शुरू होती है। इस तरह बच्चों को सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि सामाजिक कौशल, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास के लिए भी प्रशिक्षण मिलता है।
सिग्नल शाला मुंबई में एक मिसाल बनकर उभरा है, जो यह दिखाता है कि सड़क पर जीवन यापन करने वाले बच्चों को भी सही दिशा, अवसर और समर्थन मिलने पर वे सामाजिक और शैक्षिक रूप से विकसित हो सकते हैं।
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