बिहार के मुंगेर जिले की ऐतिहासिक बंदूक फैक्ट्रियां, जो पिछले कुछ वर्षों से सख्त लाइसेंस नियमों और अवैध हथियार निर्माण के बढ़ते चलन के कारण संकट में थीं, अब एक बार फिर रफ्तार पकड़ने की तैयारी में हैं। करीब 250 साल से अधिक पुरानी इन फैक्ट्रियों को अब प्रस्तावित डिफेंस कॉरिडोर के जरिए नया जीवन मिलने की उम्मीद है, जहां केवल हथियार ही नहीं, बल्कि रक्षा से जुड़े कई आधुनिक उपकरणों का निर्माण किया जाएगा।
डिफेंस कॉरिडोर के तहत मुंगेर में छोटे हथियारों के अलावा बुलेटप्रूफ जैकेट, विस्फोटक सामग्री, हेलमेट, बॉडी आर्मर और नाइट विजन डिवाइस जैसे रक्षा उपकरणों के उत्पादन की योजना है। इससे न केवल स्थानीय उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
मुंगेर की ये फैक्ट्रियां भारत की सबसे पुरानी जीवित हथियार निर्माण इकाइयों में गिनी जाती हैं। इनकी स्थापना वर्ष 1762 में औपनिवेशिक शासन के दौरान हुई थी। समय के साथ ये इकाइयां ब्रिच-लोडिंग (पीछे से लोड होने वाली) बंदूकों के निर्माण का एक विशेष केंद्र बन गईं। यह हुनर पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहा और मुंगेर शहर की अर्थव्यवस्था व पहचान का अहम हिस्सा बन गया।
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हालांकि, हाल के दशकों में कड़े लाइसेंस नियमों और अवैध हथियार निर्माण के बढ़ते नेटवर्क के कारण वैध बंदूक उद्योग को भारी नुकसान हुआ। इससे कारीगरों की संख्या घटी और पारंपरिक उद्योग कमजोर पड़ता गया।
अब डिफेंस कॉरिडोर परियोजना से उम्मीद की जा रही है कि आधुनिक तकनीक और सरकारी सहयोग के साथ मुंगेर का पारंपरिक कौशल फिर से राष्ट्रीय रक्षा उत्पादन से जुड़ेगा। इससे स्थानीय कारीगरों की विशेषज्ञता को नई दिशा मिलेगी और मुंगेर एक बार फिर देश के रक्षा उत्पादन मानचित्र पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगा।
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