टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बुधवार को बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए नियुक्ति नहीं मांगेंगे। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक है। उन्होंने टाटा संस के बोर्ड से उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का अनुरोध किया है, ताकि नेतृत्व परिवर्तन सुचारु रूप से हो सके।
चंद्रशेखरन ने अपने बयान में कहा कि टाटा समूह में उनके पेशेवर जीवन के 40 वर्ष पूरे हो चुके हैं। उन्होंने इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने का अवसर मिलने पर आभार जताया। उन्होंने कहा कि पिछले करीब एक दशक तक टाटा संस का नेतृत्व करना उनके लिए बड़े सम्मान और जिम्मेदारी का विषय रहा है।
चंद्रशेखरन ने बताया कि उनके अगले पांच साल के कार्यकाल को बढ़ाने का प्रस्ताव सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से सुझाया था। टाटा संस की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति और बोर्ड ने भी इस प्रस्ताव की सिफारिश की थी। यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को बोर्ड के सामने रखा गया था।
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हालांकि, बोर्ड के एक सदस्य के समर्थन नहीं देने के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। चंद्रशेखरन ने कहा कि सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने के कारण उन्होंने उस समय फैसला टाल दिया था। अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि कार्यकाल समाप्त होने पर वह दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे।
चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुके हैं। वह टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टीसीएस और इंडियन होटल्स समेत कई टाटा समूह की कंपनियों के चेयरमैन भी हैं।
यह घटनाक्रम टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति को लेकर मतभेदों की खबरों के बीच सामने आया है। टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और टाटा ट्रस्ट्स के पास इसकी बहुमत हिस्सेदारी है।
खबर के बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयरों में करीब पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बीएसई पर शेयर 2,318.10 रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव 2,440.20 रुपये से 122.10 रुपये कम था।
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