भारतीय मूल के अमेरिकी वकील नील कात्याल ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक टैरिफ नीति को चुनौती देकर एक ऐतिहासिक जीत हासिल की। अदालत ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को खारिज कर दिया।
कात्याल ने दलील दी कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का उपयोग सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर टैरिफ लगाने के लिए करना असंवैधानिक है। फैसले के बाद उन्होंने कहा, “आज सुप्रीम कोर्ट ने कानून के शासन को कायम रखा। राष्ट्रपति शक्तिशाली हो सकते हैं, लेकिन संविधान उनसे भी अधिक शक्तिशाली है। केवल कांग्रेस को अमेरिकी जनता पर कर लगाने का अधिकार है।”
यह मामला छोटे व्यवसायों द्वारा दायर मुकदमे से शुरू हुआ था, जिसे लिबर्टी जस्टिस सेंटर का समर्थन मिला। ट्रंप ने टैरिफ को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया था। कात्याल ने इस निर्णय को संवैधानिक संतुलन और शक्तियों के विभाजन की ऐतिहासिक जीत करार दिया।
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नील कात्याल का जन्म शिकागो में भारतीय प्रवासी माता-पिता के घर हुआ। उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई की। वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश स्टीफन ब्रेयर के क्लर्क रह चुके हैं और 50 से अधिक मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर चुके हैं।
फैसले के बाद ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “शर्मनाक” बताया, लेकिन साथ ही एक नए प्रावधान के तहत 10% अस्थायी वैश्विक टैरिफ लागू करने का कार्यकारी आदेश भी जारी किया।
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