लंदन, यूनाइटेड किंगडम — फिलिस्तीन एक्शन से जुड़े ब्रिटिश कार्यकर्ता हेबा मुरैसी और कमरान अहमद, जो जेल में भूख हड़ताल के चलते मौत के कगार पर हैं, अपनी मांगें पूरी होने तक विरोध जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उनके मित्रों और परिजनों ने यह जानकारी दी है।
हेबा मुरैसी पिछले 67 दिनों से और कमरान अहमद 60 दिनों से भोजन लेने से इनकार कर रहे हैं। यह भूख हड़ताल नवंबर में शुरू हुए एक क्रमिक विरोध का हिस्सा है। इस आंदोलन में शामिल आठ लोगों में से पांच ने गंभीर स्वास्थ्य जोखिम के चलते अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है, जबकि 23 वर्षीय ल्यूई कियारामेलो भी अब तक भोजन से दूर हैं।
31 वर्षीय हेबा मुरैसी की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। वह मांसपेशियों में ऐंठन, सांस लेने में तकलीफ, तेज दर्द और श्वेत रक्त कोशिकाओं की कमी से जूझ रही हैं। पिछले नौ हफ्तों में उन्हें तीन बार अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके दोस्तों का कहना है कि उनकी याददाश्त भी कमजोर हो रही है।
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कमरान अहमद, जो लंदन के रहने वाले मैकेनिक हैं, के बाएं कान की सुनने की क्षमता कम हो गई है। उन्हें सीने में दर्द, चक्कर और सांस फूलने की शिकायत है। उनका हृदयगति कई बार 40 धड़कन प्रति मिनट से नीचे चली जाती है। उन्हें भूख हड़ताल शुरू करने के बाद छह बार अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका है।
ये सभी विचाराधीन कैदी ब्रिटेन में इज़राइली रक्षा कंपनी एल्बिट सिस्टम्स और रॉयल एयर फोर्स बेस से जुड़े मामलों में आरोपों का सामना कर रहे हैं, जिन्हें वे नकारते हैं। उनकी मांगों में जमानत, निष्पक्ष सुनवाई, फिलिस्तीन एक्शन पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाना और जेलों में कथित सेंसरशिप समाप्त करना शामिल है।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इन कैदियों की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है और इससे स्थायी नुकसान या मृत्यु तक हो सकती है। इसके बावजूद ब्रिटिश सरकार ने हस्तक्षेप से इनकार किया है, जिससे मानवाधिकार संगठनों और चिकित्सा विशेषज्ञों में गंभीर चिंता बनी हुई है।
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