संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर बुधवार को भी चर्चा जारी रहेगी। नीट-यूजी पेपर लीक विवाद और देशभर में हुए छात्र आंदोलनों की पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार यह संशोधन विधेयक लेकर आई है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य परीक्षा संबंधी अपराधों पर सख्त कार्रवाई, दोषियों के लिए कड़ी सजा और पेपर लीक जैसे मामलों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना है।
इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने उम्मीद जताई कि राहुल गांधी इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सार्थक चर्चा करेंगे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचेंगे। उन्होंने कहा कि यह कानून लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है और इस पर गंभीर विचार-विमर्श होना चाहिए।
मंगलवार को चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने की। उन्होंने विधेयक को पेश करते हुए इसे "स्वतंत्र भारत के इतिहास का अपनी तरह का पहला कानून" बताया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और यह संशोधन परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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वहीं विपक्ष ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले और छात्र आंदोलनों को लेकर सरकार की आलोचना की। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के हितों की रक्षा करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि हजारों छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन किया, लेकिन उनकी चिंताओं का समय पर समाधान नहीं किया गया।
बहस के दौरान भारतीय जनता पार्टी सांसद बांसुरी स्वराज ने युवाओं में प्रचलित "जेन-ज़ेड" शैली का प्रयोग करते हुए कहा कि "मोदी जी ने समय रहते समस्या को समझा और उसका विधायी समाधान प्रस्तुत किया।" इसके बाद प्रियंका गांधी द्वारा नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर की गई टिप्पणी को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। सत्तापक्ष के सदस्यों ने उन पर भ्रामक और व्यक्तिगत आरोप लगाने का आरोप लगाया।
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