राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी। इसके साथ ही देश में पेपर लीक रोकने के लिए कानून और अधिक सख्त हो गया है। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के साथ यह संशोधित कानून लागू हो गया है।
कानून मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, अब पेपर लीक मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके अलावा ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक राज्य में फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित की जाएंगी, जहां रोजाना सुनवाई होगी और मुकदमे का निपटारा 90 दिनों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।
संशोधित कानून के तहत पेपर लीक या परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों को कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है। साथ ही दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। यदि मामला संगठित अपराध से जुड़ा पाया जाता है तो न्यूनतम 7 वर्ष की कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य पेपर लीक के पूरे नेटवर्क को खत्म करना, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना तथा छात्रों का विश्वास मजबूत करना है।
यह संशोधन विधेयक पहले लोकसभा और उसके बाद राज्यसभा से पारित हुआ था। इससे पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा था कि सरकार छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
नए कानून की प्रमुख बातें:
- प्रत्येक राज्य में फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन।
- जांच अधिकतम दो महीने में पूरी होगी।
- सुनवाई 90 दिनों के भीतर पूरी करने का लक्ष्य।
- सजा 3-5 वर्ष से बढ़ाकर 5-10 वर्ष।
- संगठित पेपर लीक मामलों में 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना।
- जांच के लिए विशेष स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
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