कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में केंद्र सरकार पर पेपर लीक के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में पेपर लीक अब एक सामान्य घटना बन चुकी है और इससे करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि नीट परीक्षा में अनियमितताओं और पुनर्परीक्षा की घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार, भारत को अब सरकार-केंद्रित नहीं बल्कि छात्र-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली 19वीं सदी की सोच पर आधारित है, जबकि आज के समय में छात्रों की जरूरतों और क्षमताओं को केंद्र में रखकर व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
राहुल गांधी ने दावा किया कि देशभर में पेपर लीक की 152 घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनसे लगभग 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में दोषियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, "दोष सिद्ध होने की दर शून्य है। अब तक किसी को सजा नहीं मिली और न ही किसी को जेल भेजा गया।"
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उन्होंने कहा कि पेपर लीक के मामलों में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। राहुल गांधी के अनुसार, जिन लोगों के पास करोड़ों रुपये हैं, वे मनचाहा प्रश्नपत्र हासिल कर सकते हैं। इससे ईमानदार और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि देश में लगभग 9 करोड़ युवा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन इनमें से केवल 6 लाख ही सफल हो पाते हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं उन लाखों मेहनती छात्रों की उम्मीदों और वर्षों की मेहनत पर पानी फेर देती हैं।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस समस्या पर सहमति बनाकर सख्त कदम उठाने की अपील की और कहा कि यह केवल परीक्षा का नहीं, बल्कि भारत के युवाओं के भविष्य का सवाल है।
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