जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में दहेज प्रथा और अन्य सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन के उद्देश्य से एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) राजौरी ने कालाकोट क्षेत्र के दूरदराज इलाकों में एक मेगा विधिक सेवा शिविर का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम का आयोजन एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्देश के तहत किया गया, जिसका उद्देश्य समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाना है। शिविर के दौरान लोगों को दहेज प्रथा के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया और इसे एक गंभीर सामाजिक अपराध के रूप में समझाया गया। अधिकारियों ने कहा कि दहेज न केवल महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करता है, बल्कि यह समाज में असमानता और हिंसा को भी बढ़ावा देता है।
कार्यक्रम में उपस्थित कानूनी विशेषज्ञों और अधिकारियों ने महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया और बताया कि दहेज से जुड़े मामलों में कानून किस प्रकार उनकी सुरक्षा करता है। साथ ही, लोगों को घरेलू हिंसा, बाल विवाह और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी जानकारी दी गई।
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डीएलएसए के अधिकारियों ने यह भी जोर दिया कि समाज से इन कुरीतियों को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे दहेज प्रथा का बहिष्कार करें और अपने परिवारों व समुदाय में जागरूकता फैलाएं।
इस तरह के शिविरों से न केवल कानूनी जानकारी का प्रसार होता है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।
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