अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर से उबरते हुए गुरुवार (22 जनवरी 2026) को शुरुआती कारोबार में 15 पैसे की बढ़त के साथ 91.50 के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की धारणा में सुधार और घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख के चलते रुपये को समर्थन मिला।
फॉरेक्स कारोबारियों ने बताया कि निवेशकों का मनोबल उस समय मजबूत हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में 21 जनवरी 2026 को आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में यह घोषणा की कि वह ग्रीनलैंड को लेकर यूरोप पर प्रस्तावित टैरिफ लगाने की योजना को वापस ले रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने का उनका इरादा नहीं है, जिससे वैश्विक व्यापार तनाव कम होने की उम्मीद जगी।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 91.54 पर खुला और कुछ ही देर में मजबूती के साथ 91.50 पर कारोबार करने लगा। इससे पहले बुधवार (21 जनवरी 2026) को रुपया 68 पैसे टूटकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 91.65 पर बंद हुआ था।
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हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते रुपये पर दबाव अब भी बना हुआ है। अमेरिका के साथ लंबित व्यापार समझौता रुपये के लिए एक अहम सहारा बना हुआ है। जब तक भू-राजनीतिक जोखिम कम नहीं होते और व्यापार समझौता अंतिम रूप नहीं लेता, तब तक रुपये में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
इस बीच, डॉलर इंडेक्स छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले 0.02 प्रतिशत बढ़कर 98.78 पर रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 533.37 अंकों की तेजी के साथ 82,443 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 157.20 अंक चढ़कर 25,314.70 पर रहा। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 1,787.66 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की।
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