संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान पर लगे प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले विशेषज्ञ पैनल का कार्यकाल बढ़ाने के लिए अमेरिका समर्थित प्रस्ताव को रूस और चीन ने वीटो कर दिया। प्रस्ताव के पक्ष में 11 वोट पड़े, जबकि रूस और चीन ने विरोध में मतदान किया तथा सोमालिया और पाकिस्तान ने मतदान से दूरी बनाई।
अमेरिका ने विशेषज्ञों के पैनल का कार्यकाल एक और साल बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, ताकि वह ईरान पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के अनुपालन और संभावित उल्लंघनों की स्वतंत्र निगरानी जारी रख सके। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, मौजूदा पैनल का कार्यकाल 26 सितंबर 2026 को समाप्त होना था।
रूस और चीन लंबे समय से प्रतिबंधों की बहाली के कानूनी आधार पर सवाल उठाते रहे हैं। रूस के संयुक्त राष्ट्र राजदूत वासिली नेबेंजिया ने कहा कि पश्चिमी देशों द्वारा 2015 के परमाणु समझौते के तहत ‘स्नैपबैक’ प्रक्रिया के जरिए प्रतिबंध बहाल करना कानूनी रूप से उचित नहीं था। पश्चिमी देश इस व्याख्या को स्वीकार नहीं करते और प्रतिबंधों की बहाली को वैध मानते हैं।
और पढ़ें: 9/11 हमले की 25वीं बरसी पर ट्रंप ने दोहराया- ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे
ईरान पर लागू संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों में विदेशों में उसकी संपत्तियों को फ्रीज करना, हथियारों से जुड़े लेनदेन पर रोक और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से संबंधित प्रतिबंध शामिल हैं। रूस और चीन के वीटो से ये प्रतिबंध तत्काल समाप्त नहीं हुए हैं, बल्कि उनके स्वतंत्र निगरानी तंत्र के विस्तार का रास्ता रुक गया है।
अमेरिकी उप राजदूत जेनिफर लोसेटा ने चेतावनी दी कि विशेषज्ञ पैनल का कार्यकाल खत्म होने से प्रतिबंधों के संभावित उल्लंघनों की स्वतंत्र और तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग में कमी आ सकती है। वहीं, ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने रूस और चीन के फैसले का स्वागत किया और दोनों देशों को धन्यवाद दिया।
मामला ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर जारी अंतरराष्ट्रीय चिंता के बीच सामने आया है। परमाणु निगरानी से जुड़े मुद्दों पर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। फ्रांस ने भी प्रतिबंधों के प्रभावी अनुपालन की निगरानी जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तलाशने की बात कही है।
और पढ़ें: ट्रंप की ईरान के पिकैक्स माउंटेन पर जल्द हमले की धमकी, जानिए अमेरिका क्यों बना रहा निशाना