यूक्रेन के दक्षिण-पूर्वी इलाकों में रूसी हमलों के बाद गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। अहम बुनियादी ढांचे पर हुए बड़े हमलों के कारण कड़ाके की सर्दी के बीच लाखों लोग अंधेरे और ठंड में रहने को मजबूर हो गए हैं। यूक्रेनी अधिकारी तेजी से बिजली बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कई इलाकों में हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने गुरुवार को कहा कि रातभर हुए रूसी हमलों का मकसद देश को “तोड़ना” था। उन्होंने बताया कि ज़ापोरिज़्झिया और द्निप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्रों में बिजली, हीटिंग और पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है। द्निप्रोपेत्रोव्स्क में मरम्मत दल अभी भी सेवाएं बहाल करने में जुटे हैं। ज़ेलेंस्की ने रूस पर यूक्रेन की जनता को “जानबूझकर यातना” देने का आरोप लगाते हुए सहयोगी देशों से कड़ा जवाब देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सर्दियों में ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर इस तरह के हमलों का कोई सैन्य औचित्य नहीं है। यूक्रेन का आरोप है कि रूस हर सर्दी में नागरिकों का मनोबल तोड़ने के लिए ऊर्जा ठिकानों पर हमले तेज कर देता है। उप प्रधानमंत्री ओलेक्सी कुलेबा के अनुसार, द्निप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र में 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
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ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि गुरुवार सुबह तक करीब आठ लाख लोग बिजली के बिना थे। कई खदानों में ब्लैकआउट हुआ, हालांकि मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, पावलोहराद शहर में पानी की आपूर्ति बहाल होने में एक दिन तक लग सकता है।
इस बीच, यूक्रेनी वायुसेना ने कहा कि रूस ने 97 ड्रोन से हमला किया, जिनमें से 70 को मार गिराया गया, जबकि 27 अलग-अलग स्थानों पर गिरे। रूस ने चेतावनी दी है कि यदि युद्धविराम के बाद यूक्रेन में विदेशी सैनिक तैनात होते हैं, तो उन्हें वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा। दूसरी ओर, यूक्रेन का कहना है कि युद्धविराम की संभावनाएं अब भी दूर हैं, क्योंकि कई अहम मुद्दे अनसुलझे हैं।
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