मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच संघर्ष और गहरा गया है। पहली बार सऊदी अरब ने अमेरिका के साथ मिलकर इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया संगठन पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (पीएमएफ) के ठिकानों पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की है। बुधवार की दरमियानी रात किए गए इन हवाई हमलों में पीएमएफ के कई लड़ाके मारे गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने इराक की सीमा में घुसकर पीएमएफ द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हथियार भंडारों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निशाना बनाया। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई सऊदी अरब पर हुए ड्रोन हमलों के बाद की गई, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष और जटिल हो गया है।
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका और सऊदी अरब के संयुक्त अभियान में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कम से कम चार सदस्यों की मौत हुई है। ईरान ने बताया कि उत्तरी इराक के दियाला प्रांत में हुए हमलों में अली असगर अस्तानेह, अबोलफजल मोताकी, मोर्तेजा अकबरी और अमीर अब्बास दरहमफोरौश मारे गए।
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वहीं, कुछ अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया कि हमलों में करीब 20 ईरानी सलाहकार और तकनीकी विशेषज्ञ भी मारे गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन ठिकानों को इसलिए निशाना बनाया गया ताकि ईरान समर्थित समूहों की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को कमजोर किया जा सके।
पीएमएफ ने दावा किया कि बगदाद, दियाला, किरकुक और बसरा समेत इराक के सात प्रांतों में उसके कम से कम 20 सदस्य मारे गए और 32 घायल हुए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि पूर्वी इराक में हथियारों और लॉजिस्टिक्स ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इस कार्रवाई पर इराक ने नाराजगी जताई है। इराक की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इसे "अस्वीकार्य आक्रामकता" बताया है और कहा कि ऐसे हमले देश की संप्रभुता का उल्लंघन हैं।
पीएमएफ का गठन वर्ष 2014 में आतंकी संगठन आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई के दौरान हुआ था। उस समय इसमें कई अलग-अलग मिलिशिया समूह शामिल हुए थे। वर्ष 2016 में इराकी संसद के कानून के बाद पीएमएफ को आधिकारिक सुरक्षा बलों का हिस्सा बनाया गया।
पीएमएफ के कई प्रभावशाली गुटों के ईरान के आईआरजीसी से करीबी संबंध माने जाते हैं। यह संगठन ईरान के "एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस" नेटवर्क का हिस्सा माना जाता है, जिसमें हमास, हूती और हिज्बुल्लाह जैसे समूह भी शामिल हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, पीएमएफ की ताकत 2014 में करीब 60 हजार लड़ाकों से बढ़कर अब लगभग 2.38 लाख तक पहुंच चुकी है। इराक की सुरक्षा व्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी करीब 16.5 प्रतिशत बताई जाती है, जिससे देश की राजनीति और सुरक्षा मामलों में इसका प्रभाव काफी बढ़ गया है।
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