अमेरिका के लॉस एंजेलिस में चल रहे एक ऐतिहासिक मुकदमे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका और उनके संभावित नुकसान पर बहस तेज हो गई है। इस मामले में इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी ने अदालत में गवाही देते हुए कहा कि उनका मानना नहीं है कि लोग सोशल मीडिया के “क्लिनिकली एडिक्ट” हो सकते हैं। यह मुकदमा उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें कहा गया है कि सोशल मीडिया कंपनियां बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार हैं।
इस केस में Meta और गूगल का यूट्यूब अभी भी आरोपी के रूप में शामिल हैं, जबकि TikTok और Snap पहले ही समझौता कर चुके हैं।
अदालत में मोसेरी ने कहा कि “क्लिनिकल एडिक्शन” और “समस्याग्रस्त उपयोग” में अंतर समझना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “समस्याग्रस्त उपयोग” का मतलब है कि कोई व्यक्ति इंस्टाग्राम पर उतना समय बिताए जितना वह खुद सही नहीं मानता। उन्होंने माना कि ऐसा होना संभव है, लेकिन इसे क्लिनिकल लत कहना सही नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे मेडिकल विशेषज्ञ नहीं हैं, लेकिन उनके किसी करीबी ने गंभीर लत का अनुभव किया है, इसलिए वे शब्दों का इस्तेमाल सावधानी से करते हैं।
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सुनवाई के दौरान इंस्टाग्राम के कॉस्मेटिक फिल्टर्स और उनके शरीर की छवि पर प्रभाव को लेकर भी बहस हुई। आलोचकों का कहना है कि ये फिल्टर्स प्लास्टिक सर्जरी को बढ़ावा देते हैं। जनवरी 2025 में Meta ने सभी थर्ड-पार्टी AR फिल्टर्स बंद कर दिए थे।
इसके अलावा, किशोरों की सुरक्षा से जुड़े फीचर्स भी जांच के दायरे में हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि रिसर्चरों द्वारा बनाए गए टीन अकाउंट्स को अनुचित और संवेदनशील कंटेंट की सिफारिश की गई थी। Meta ने इस रिपोर्ट को भ्रामक बताया है। इसी बीच, न्यू मैक्सिको में Meta के खिलाफ एक और मुकदमा भी शुरू हो चुका है।
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