शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार (17 जुलाई 2026) को कहा कि वह “किसी भी कीमत पर 20 जुलाई तक जीवित रहेंगे।” उनका अनिश्चितकालीन अनशन शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गया है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय से जारी उपवास के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति अब गंभीर चरण में पहुंच गई है।
सोनम वांगचुक ने अपनी कमजोर होती शारीरिक स्थिति को स्वीकार किया, लेकिन कहा कि उनका संकल्प अभी भी मजबूत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने उद्देश्य को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और आंदोलन जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
वहीं, जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन भी शुक्रवार को 28वें दिन में प्रवेश कर गया। यह प्रदर्शन कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में किया जा रहा है। इस आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की मांग उठाई है।
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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा शुक्रवार को सोनम वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों से मिलने जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों के प्रति अपना समर्थन जताया और उनकी मांगों के साथ एकजुटता दिखाई।
डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक भोजन नहीं लेने से शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की सलाह दी है। हालांकि, वांगचुक ने अपने आंदोलन को जारी रखने का फैसला किया है।
सोनम वांगचुक शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। वह हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन और सामाजिक मुद्दों को लेकर लंबे समय से आवाज उठाते रहे हैं।
उनके अनशन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग उनके समर्थन में आगे आए हैं, जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार उनके लंबे उपवास को लेकर चिंता जता रहे हैं।
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