पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर आंतरिक कलह एक नए राजनीतिक संकट का रूप लेती दिख रही है। हाल ही में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा निष्कासित कुछ विधायकों के बीच कथित गुप्त बैठकों ने पार्टी में विभाजन की अटकलों को तेज कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, लगभग 15 से 20 टीएमसी विधायक ऐसे नेताओं के संपर्क में हैं जो पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन बैठकों में पार्टी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और वैकल्पिक राजनीतिक मंच बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि क्या पश्चिम बंगाल में महाराष्ट्र जैसा राजनीतिक घटनाक्रम दोहराया जा सकता है, जहां एक बड़े दल में टूट हुई थी।
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सूत्रों का दावा है कि कुछ असंतुष्ट नेता ‘असली तृणमूल’ नाम से एक अलग राजनीतिक संगठन बनाने की योजना पर विचार कर रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी भी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन प्रयासों के संकेत जरूर मिल रहे हैं।
हाल ही में टीएमसी ने अपने दो विधायकों—ऋतब्रत बनर्जी और संदिपन साहा—को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किया था। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने पार्टी के कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों और हस्ताक्षर प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे और अहम बैठकों से भी दूरी बनाई थी।
इन घटनाओं के बाद पार्टी के भीतर मतभेद और गहरे होते दिख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रहे हैं।
कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि ऋतब्रत बनर्जी कुछ विधायकों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकते हैं, हालांकि अभी किसी बड़े स्तर की बगावत के स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी पहले ही चुनावी प्रदर्शन को लेकर दबाव में है और अब आंतरिक असंतोष ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह असंतोष कुछ नेताओं तक सीमित रहता है या फिर एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप लेता है।
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