पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने आगामी उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं, अरूप रॉय गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है।
यह फैसला चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाने के बाद आया है। आयोग ने कहा था कि दोनों गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा कर रहे हैं, इसलिए अंतिम फैसला होने तक दोनों को अलग पहचान दी जाएगी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के सामने तीन नामों का विकल्प दिया था। इनमें ‘नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस’, ‘वेस्ट बंगाल तृणमूल कांग्रेस’ और ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ शामिल थे। आयोग ने तीसरे नाम को मंजूरी दी और उनके पसंदीदा चुनाव चिन्ह के तौर पर लिफाफा आवंटित किया।
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चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को दोनों पक्षों की सुनवाई की थी। पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में ऋतब्रत बनर्जी, अखरुज्जमान, अरूप रॉय, चंद्रिमा भट्टाचार्य और रिजू दत्ता शामिल थे। दोनों गुट खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए आयोग से मान्यता की मांग कर रहे हैं।
आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि फिलहाल दोनों प्रतिद्वंद्वी समूहों को समान आधार पर रखते हुए उपचुनाव के लिए अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए गए हैं। यह व्यवस्था विवाद पर अंतिम निर्णय होने तक लागू रहेगी।
आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों में दोनों गुट अब अपने नए नाम और आवंटित चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे। मूल पार्टी के नाम और ‘फूल-घास’ चिन्ह पर अंतिम फैसला चुनाव आयोग बाद में करेगा।
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