अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ताओं के बीच परमाणु समझौते को लेकर दोनों देशों के रुख में मतभेद सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करने पर सहमत हो गया है, जबकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसके राष्ट्रीय अधिकारों और हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित हुए बिना किसी समझौते को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि तेहरान के वार्ताकार अमेरिका के वादों और बयानों पर भरोसा नहीं करते। उन्होंने कहा, “जब तक हमें यह विश्वास नहीं हो जाता कि ईरानी जनता के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं, तब तक किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
ईरान की प्रमुख मांगों में उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना और विदेशी बैंकों में जमा उसकी जमी हुई संपत्तियों को जारी करना शामिल है। इसके अलावा, ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अपने अधिकारों और सुरक्षा हितों को भी समझौते का हिस्सा बनाना चाहता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक कच्चे तेल के लगभग 20 से 25 प्रतिशत परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान कई मुद्दों पर सहमति के करीब पहुंच चुके हैं, लेकिन ईरान का परमाणु कार्यक्रम अभी भी सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा कि दोनों देश “बेहद अच्छे समझौते” के करीब हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समझौता सफल होता है तो यह बेहतर होगा, अन्यथा अमेरिका अन्य विकल्पों पर विचार करेगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान ने सैन्य उद्देश्यों के लिए परमाणु हथियार विकसित न करने और ऐसे हथियार हासिल न करने की बात स्वीकार की है।
रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देना चाहते हैं। हालांकि, ईरान की ओर से प्रस्ताव पर अंतिम प्रतिक्रिया आने में कुछ दिन लग सकते हैं।
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