अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए इज़राइल की जमकर तारीफ की है। ट्रंप ने इज़राइल को अमेरिका का “महान सहयोगी” बताया और कहा कि यह देश हमेशा कठिन समय में अमेरिका के साथ खड़ा रहा है।
ट्रंप ने कहा कि चाहे लोग इज़राइल को पसंद करें या न करें, उन्होंने अमेरिका के प्रति अपनी वफादारी साबित की है। उन्होंने इज़राइल को साहसी, निडर, वफादार और बुद्धिमान बताते हुए कहा कि यह देश संघर्ष के समय हार नहीं मानता और जीतना जानता है।
ट्रंप के बयान को नाटो पर निशाना माना जा रहा है। उन्होंने “अन्य देश जिन्होंने अपना असली रंग दिखाया” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे नाटो देशों पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप पहले भी नाटो पर अमेरिका का पर्याप्त समर्थन न करने का आरोप लगाते रहे हैं।
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उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने इज़राइल को लेबनान पर बमबारी रोकने का निर्देश दिया है। उनके अनुसार, “अब बहुत हो चुका है” और अमेरिका ने इस कार्रवाई पर रोक लगाई है। हालांकि, इज़राइल या प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से इस पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और संघर्ष विराम की स्थिति के बीच यह बयान आया है। ईरान ने भी क्षेत्रीय शांति वार्ता में लेबनान को शामिल करने की मांग की है, जहां इज़राइल की सैन्य कार्रवाई जारी है।
ट्रंप के बयान को नाटो देशों के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने पहले भी इस गठबंधन को “बेकार” और “कागजी बाघ” तक कह दिया था। इससे अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों के बीच मतभेद और गहरे होते दिख रहे हैं।
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