ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो देशों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अधिकतर नाटो सहयोगी अमेरिका की सैन्य कार्रवाई में शामिल होने को तैयार नहीं हैं और ऐसे में अमेरिका को उनकी जरूरत भी नहीं है।
ट्रंप ने कहा कि कई नाटो देशों ने साफ कर दिया है कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान में भाग नहीं लेना चाहते। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और होर्मुज़ जलसंधि को लेकर संकट गहराया हुआ है।
ट्रंप ने नाटो को “वन-वे स्ट्रीट” बताते हुए कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा पर भारी खर्च करता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे उसका साथ नहीं देते। उन्होंने लिखा, “हम उनकी रक्षा करते हैं, लेकिन वे हमारे लिए कुछ नहीं करते, खासकर जरूरत के समय।”
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राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। उनके अनुसार ईरान की नौसेना, वायुसेना और नेतृत्व ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे बाहरी मदद की आवश्यकता कम हो गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब अकेले आगे बढ़ने के लिए तैयार है और उसे नाटो या अन्य देशों जैसे जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की सहायता की जरूरत नहीं है। ट्रंप ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा, “हमें किसी की मदद की आवश्यकता नहीं है।”
इस बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान के मुद्दे पर स्वतंत्र रणनीति अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।
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