दुनिया की सबसे करीबी रणनीतिक साझेदारियों में गिने जाने वाले अमेरिका और इज़राइल के संबंधों में तनाव की अटकलें तेज हो गई हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। इस बीच, अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (डीआईए) की एक आंतरिक रिपोर्ट ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
रिपोर्टों के मुताबिक, डीआईए ने वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के खिलाफ कथित इज़राइली खुफिया गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इज़राइल की मानव खुफिया नेटवर्क और तकनीकी निगरानी क्षमता को “क्रिटिकल” स्तर पर आंका गया है। इसी वजह से कुछ अमेरिकी अधिकारी इज़राइल यात्रा के दौरान अस्थायी फोन (बर्नर फोन) और कंप्यूटर का उपयोग करते हैं तथा होटल के कमरों में बातचीत करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं।
हालांकि, वॉशिंगटन स्थित इज़राइली दूतावास ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इज़राइल का कहना है कि वह अमेरिकी अधिकारियों के खिलाफ कोई जासूसी गतिविधि नहीं करता और उसकी खुफिया कार्रवाई केवल विरोधी देशों के खिलाफ होती है।
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इस विवाद के पीछे सबसे बड़ा कारण ईरान को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस वर्ष अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया था, लेकिन अप्रैल में युद्धविराम लागू होने के बाद दोनों देशों की रणनीति अलग-अलग हो गई।
बताया जा रहा है कि ट्रंप ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान और समझौते के पक्ष में हैं, जबकि नेतन्याहू ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखने की वकालत कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर दोनों नेताओं के बीच हाल ही में हुई एक फोन वार्ता भी तनावपूर्ण रही।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू को लेकर नाराजगी जताई थी। हालांकि दोनों देशों ने संबंधों में किसी बड़े संकट से इनकार किया है, लेकिन घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को जन्म दे दिया है।
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