ब्रिटेन के सामने अब देश के बंटने का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड के शीर्ष नेताओं ने अधिक स्वायत्तता और भविष्य में स्वतंत्रता के लिए जनमत संग्रह कराने के अधिकार की मांग को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ब्रिटेन की एकता और संवैधानिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीनों क्षेत्रों के नेता वेल्स की राजधानी कार्डिफ में एकत्र हुए। उन्होंने ब्रिटेन की सरकार और प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उन्हें संभावित संवैधानिक बदलावों के लिए तैयार रहना चाहिए। नेताओं का कहना है कि इन क्षेत्रों के लोगों को अपने भविष्य को लेकर अधिक अधिकार मिलना चाहिए।
समझौते में ब्रिटेन की संसद, जिसे वेस्टमिंस्टर के नाम से जाना जाता है, पर भी सवाल उठाए गए हैं। नेताओं ने संकेत दिया कि मौजूदा केंद्रीकृत व्यवस्था का दौर समाप्त होने की ओर है और अब क्षेत्रों को अपने भविष्य पर अधिक नियंत्रण देने की जरूरत है।
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स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड का मामला
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने हाल में सांसदों से कहा था कि यदि राजनीतिक सहमति बनती है तो वह स्कॉटलैंड की स्वतंत्रता पर एक और जनमत संग्रह की अनुमति देने के लिए तैयार हैं।
वहीं, गुड फ्राइडे समझौते के तहत उत्तरी आयरलैंड को आयरलैंड गणराज्य के साथ एकीकरण पर जनमत संग्रह कराने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। हालांकि ऐसा मतदान तभी कराया जा सकता है, जब परिस्थितियों से यह संकेत मिले कि उत्तरी आयरलैंड की जनता ब्रिटेन से अलग होकर आयरलैंड के साथ जुड़ने के पक्ष में है।
ट्रंप के बयान से बढ़ी चिंता
ब्रिटेन की परेशानी इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में पहली बार स्वतंत्रता या अधिक स्वायत्तता की समर्थक पार्टियां सत्ता में हैं। ये दल अपने-अपने क्षेत्रों के लिए ज्यादा अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयरलैंड की यात्रा के दौरान संयुक्त आयरलैंड की संभावना का समर्थन किया था। उन्होंने उत्तरी आयरलैंड के आयरलैंड में शामिल होने को सकारात्मक कदम बताया। ट्रंप के इस बयान से ब्रिटेन की सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया है।
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