अमेरिका के ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बुधवार (7 जनवरी, 2026) को कहा कि वॉशिंगटन वेनेज़ुएला के तेल की बिक्री पर “अनिश्चितकाल तक” नियंत्रण रखेगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि वेनेज़ुएला के अंतरिम नेताओं ने कच्चे तेल की 3 से 5 करोड़ बैरल की बिक्री के लिए अमेरिका-प्रबंधित विपणन पर सहमति जता दी है।
क्रिस राइट ने मियामी में आयोजित गोल्डमैन सैक्स के एक ऊर्जा कार्यक्रम में कहा, “हम वेनेज़ुएला से निकलने वाले कच्चे तेल को बाजार में उतारने जा रहे हैं। सबसे पहले वहां जमा होकर रुका हुआ तेल बेचा जाएगा और उसके बाद आगे चलकर अनिश्चितकाल तक वेनेज़ुएला से होने वाले पूरे उत्पादन को हम वैश्विक बाजार में बेचेंगे।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था के तहत तेल की मार्केटिंग और बिक्री की प्रक्रिया अमेरिकी निगरानी में होगी। इससे न केवल वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ने की संभावना है, बल्कि वेनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था और उसकी संप्रभुता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लंबे समय से आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहे वेनेज़ुएला के लिए तेल ही आय का प्रमुख स्रोत है।
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राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा के अनुसार, यह सहमति वेनेज़ुएला के अंतरिम नेतृत्व के साथ हुई है, जिसका उद्देश्य तेल के निर्यात को सुव्यवस्थित करना और वैश्विक बाजार में आपूर्ति को नियंत्रित करना बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका को ऊर्जा बाजार में रणनीतिक बढ़त मिल सकती है, जबकि वेनेज़ुएला को तत्काल नकदी प्रवाह में राहत मिल सकती है।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि किसी देश के प्राकृतिक संसाधनों की बिक्री पर बाहरी नियंत्रण अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए तनाव पैदा कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह व्यवस्था कितने समय तक चलती है और इसका क्षेत्रीय व वैश्विक राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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