अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक प्रारंभिक शांति प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को किसी सहमत तीसरे देश में स्थानांतरित कर सकता है या उसके संवर्धन का स्तर कम करने पर सहमत हो सकता है। इसके बदले अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंधों और आर्थिक पाबंदियों में राहत दे सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सीधे बातचीत कतर की राजधानी दोहा में हो सकती है। पहले तुर्की के इस्तांबुल में बातचीत की संभावना जताई जा रही थी। इस समझौते को लागू कराने और उसकी निगरानी में चीन गारंटर की भूमिका निभा सकता है।
सात दिनों में खुल सकता है होर्मुज जलडमरूमध्य
प्रस्ताव के अनुसार, तेहरान और वॉशिंगटन के बीच शुरुआती सहमति बनने के सात दिनों के भीतर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को समुद्री यातायात के लिए खोल सकता है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि समझौते के प्रत्येक चरण से पहले एक स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था दोनों पक्षों की प्रतिबद्धताओं की पुष्टि करेगी। किसी भी देरी या उल्लंघन की स्थिति में मध्यस्थ और गारंटर देश विवाद सुलझाने में मदद करेंगे। प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पक्ष को बिना बदले में भरोसेमंद आश्वासन मिले कोई बड़ी रियायत न देनी पड़े।
ट्रंप पर चुनाव से पहले बढ़ा दबाव
ईरान का परमाणु कार्यक्रम दोनों देशों के बीच विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। वहीं, ईरान लगातार दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है।
3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप पर ईरान युद्ध को लेकर दबाव बढ़ रहा है। आलोचक युद्ध के कारण डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर उनकी आलोचना कर रहे हैं।
शुक्रवार को ट्रंप ने कहा कि ईरान बातचीत करना चाहता है और उसकी अर्थव्यवस्था मुश्किलों का सामना कर रही है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास समय है, जबकि ईरान के लिए अपने सैनिकों और पुलिसकर्मियों को वेतन देना भी मुश्किल हो रहा है।
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