अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव गंभीर रूप से बढ़ गया है, जहां दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले किए हैं। हालिया घटनाक्रम की शुरुआत ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक कंटेनर जहाज पर ड्रोन हमला करने के बाद हुई, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर कार्रवाई की।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने रविवार को बताया कि अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। सेंटकॉम के अनुसार, यह कार्रवाई हाल के ईरानी हमले के जवाब में की गई है, जबकि कुछ दिन पहले ही दोनों देशों के बीच शांति समझौते की बात सामने आई थी।
अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लड़ाकू विमानों को कम से कम 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले करते हुए दिखाया गया है। ये ठिकाने होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास स्थित बताए गए हैं, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
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सेंटकॉम ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि इस मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को “सतर्क, तैयार और सुरक्षित” रहना चाहिए। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान “कभी नहीं सीखेगा” और यदि हालात बिगड़े तो और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि किसी भी आक्रामकता का जवाब “कुचल देने वाली प्रतिक्रिया” से दिया जाएगा। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने भी मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है, जिसमें बहरीन और कुवैत स्थित बेस शामिल हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में एक बार फिर अनिश्चितता और तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।
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