शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान में संयुक्त अमेरिकी और इज़राइली हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई, उनके प्रमुख सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कमांडर-इन-चीफ मोहम्मद पाकपूर मारे गए। इसके अलावा ईरानी सशस्त्र बलों के अन्य वरिष्ठ कमांडरों की भी मौत हुई। रिपोर्ट के अनुसार सशस्त्र बलों के प्रमुख अब्दोलरहीम मौसावी भी हमलों में मारे गए।
ईरान ने इस हमले के जवाब में मध्य पूर्व के सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाने की घोषणा की है। ईरानी अधिकारियों ने इसे अपने शीर्ष नेताओं की मौत के बाद “सशक्त और निर्णायक प्रतिक्रिया” बताया।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा, "ईरान ने कहा कि वे आज बहुत सख्ती से हमला करेंगे, पहले से कहीं ज्यादा। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि अगर वे करेंगे, तो हम उन्हें अब तक नहीं देखी गई शक्ति से नष्ट कर देंगे!"
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हालांकि, इन हमलों की खाड़ी देशों और यूरोपीय देशों द्वारा आलोचना की गई है। उन्होंने सभी पक्षों से तनाव समाप्त कर वार्ता के जरिए विवाद सुलझाने का आग्रह किया है। कई देशों ने इस संबंध में आपात बैठक बुलाने की संभावना भी जताई है।
भारत ने भी मध्य पूर्व में स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि वह लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है। साथ ही, भारत ने अपने नागरिकों को अनावश्यक यात्रा से बचने और क्षेत्रीय भारतीय मिशनों से संपर्क बनाए रखने की सलाह दी है।
यह हमले क्षेत्रीय स्थिरता को भंग कर सकते हैं और वैश्विक तेल बाजार सहित आर्थिक और सुरक्षा मामलों में भी गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं।
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