ईरान से बढ़ते ड्रोन खतरों को देखते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका अब मध्य पूर्व में अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम ‘मेरोप्स’ तैनात करने की तैयारी कर रहा है। यह तकनीक पहले ही यूक्रेन युद्ध के दौरान रूसी ड्रोन के खिलाफ प्रभावी साबित हो चुकी है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली का उद्देश्य क्षेत्र में ईरानी ड्रोन हमलों को रोकना है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने पहले भी पैट्रियट और थाड मिसाइल रक्षा प्रणालियों के जरिए ईरानी मिसाइलों को रोकने में सफलता हासिल की है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन हमलों को रोकने के लिए अभी भी पर्याप्त और भरोसेमंद साधनों की कमी है।
दरअसल, ईरान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे शाहेद ड्रोन कम लागत वाले लेकिन प्रभावी हथियार माने जाते हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने माना कि इन ड्रोन से निपटने की रणनीति अभी तक पूरी तरह सफल नहीं रही है।
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‘मेरोप्स’ सिस्टम कैसे काम करता है?
‘मेरोप्स’ एक आधुनिक काउंटर-ड्रोन तकनीक है जो दुश्मन ड्रोन को रोकने के लिए छोटे एआई आधारित ड्रोन का इस्तेमाल करती है। यह सिस्टम इतना कॉम्पैक्ट है कि इसे एक मिड-साइज पिकअप ट्रक में रखा जा सकता है। यह आने वाले ड्रोन का पता लगाकर उन्हें हवा में ही इंटरसेप्ट कर सकता है।
ड्रोन अक्सर रडार से बच जाते हैं क्योंकि रडार सिस्टम मुख्य रूप से तेज रफ्तार मिसाइलों को ट्रैक करने के लिए बनाए गए हैं। ऐसे में ‘मेरोप्स’ खासतौर पर ड्रोन की पहचान कर उन्हें तुरंत निष्क्रिय करने के लिए डिजाइन किया गया है।
इस सिस्टम की एक बड़ी खासियत इसकी कम लागत भी है। महंगी मिसाइलों के बजाय छोटे काउंटर-ड्रोन से दुश्मन ड्रोन को गिराया जाता है, जिससे सैन्य खर्च कम होता है।
यूक्रेन युद्ध से मिली सीख
यह सिस्टम पहले पोलैंड और रोमानिया जैसे नाटो देशों में भी तैनात किया जा चुका है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन अनुभवों के आधार पर अब मध्य पूर्व में ड्रोन खतरों से निपटने की रणनीति तैयार की जा रही है।
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