अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता जारी रहने के बावजूद सैन्य तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास दो ईरानी ड्रोन मार गिराने का दावा किया। अमेरिकी सैन्य कमान सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार ये ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा बन रहे थे।
सेंटकॉम ने कहा कि मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी बलों ने दो एकतरफा हमलावर ईरानी ड्रोन को नष्ट कर दिया। अमेरिकी सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि वह क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
लगातार दूसरे दिन हुई इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच टकराव अभी थमा नहीं है। इससे पहले शनिवार को अमेरिका ने ईरान के गोरुक और क़ेश्म द्वीप स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। गोरुक, ईरान के होर्मोज़गान प्रांत का एक तटीय शहर है, जबकि क़ेश्म फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप माना जाता है।
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रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने क़ेश्म द्वीप पर सैन्य रडार, एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम और ड्रोन अड्डे स्थापित कर रखे हैं, जिनके जरिए वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी करता है। यही कारण है कि यह क्षेत्र दोनों देशों के बीच रणनीतिक टकराव का केंद्र बना हुआ है।
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत की ओर सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। सेंटकॉम के अनुसार इनमें से छह मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जबकि एक अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। इस हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शांति वार्ता के बावजूद दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर मतभेद बने हुए हैं। यही वजह है कि बातचीत के साथ-साथ सैन्य कार्रवाई का सिलसिला भी जारी है।
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