वैश्विक बॉन्ड बाजारों में गुरुवार को स्थिरता देखने को मिली, जब अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने बॉन्ड बाजार में जारी भारी बिकवाली को थामने के लिए हस्तक्षेप किया। इस कदम से निवेशकों की चिंताएं कुछ कम हुईं, बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई, डॉलर कमजोर पड़ा और वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी दर्ज की गई।
अमेरिकी ट्रेजरी ने लंबी अवधि के ऋण प्रतिभूतियों के बॉन्ड बायबैक का आकार दोगुना करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है। सप्ताह की शुरुआत में 30 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 2007 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी।
एशियाई कारोबार के दौरान 30 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड मामूली गिरकर 5.1890 प्रतिशत रही। पिछले सत्र में इसमें 9 बेसिस प्वाइंट की गिरावट आई थी। इसी तरह बेंचमार्क 10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बुधवार को 5 बेसिस प्वाइंट गिरने के बाद 4.6466 प्रतिशत पर रही।
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नेशनल ऑस्ट्रेलिया बैंक के वरिष्ठ अर्थशास्त्री टेलर नजेंट ने कहा कि घोषणा के समय को बाजार ने इस संकेत के रूप में लिया कि अमेरिकी अधिकारी लंबी अवधि की उधारी लागत पर बढ़ते दबाव को लेकर सतर्क हैं। उन्होंने कहा कि इस कदम से बुनियादी आर्थिक परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन बॉन्ड यील्ड कर्व में तेजी से बदलाव जरूर देखने को मिला।
टोक्यो में जापानी सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी कई दशक के उच्च स्तर से नीचे आई। 20 वर्षीय जापानी सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.5 बेसिस प्वाइंट गिरकर 3.700 प्रतिशत रही, जबकि 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड में 4.5 बेसिस प्वाइंट की गिरावट दर्ज की गई। जर्मनी के बुंड फ्यूचर्स और फ्रांस के ओएटी फ्यूचर्स में भी बढ़त हुई, जिससे यील्ड में कमी का संकेत मिला।
बढ़ते सरकारी कर्ज, प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े निवेश के लिए भारी उधारी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने अमेरिका से लेकर जर्मनी और जापान तक बॉन्ड बाजारों में तेज बिकवाली का दबाव पैदा किया था।
हालांकि निवेशकों का मानना है कि अमेरिकी ट्रेजरी का हस्तक्षेप बॉन्ड कीमतों को अस्थायी सहारा दे सकता है। केजीआई के मुख्य निवेश अधिकारी कुस्सन लियुंग ने कहा कि अत्यधिक हस्तक्षेप से संस्थागत निवेशकों की बिकवाली बढ़ सकती है।
बाजार धारणा में सुधार के बाद शेयर बाजारों में भी तेजी आई। जापान के निक्केई और जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के एमएससीआई सूचकांक में 1.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। नैस्डैक फ्यूचर्स 0.5 प्रतिशत चढ़े, जबकि एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में भी बढ़त रही।
बॉन्ड यील्ड में गिरावट से डॉलर दबाव में रहा और प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले 2.5 महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। यूरो 1.1674 डॉलर के आसपास रहा, जबकि ब्रिटिश पाउंड 1.3600 डॉलर पर स्थिर रहा।
इस बीच, फेडरल रिजर्व की बैठक के विवरण से मुद्रास्फीति को लेकर बढ़ती चिंता सामने आई। कई नीति-निर्माताओं ने संकेत दिया कि यदि मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत लक्ष्य की ओर नहीं बढ़ती है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है।
कमोडिटी बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.33 प्रतिशत बढ़कर 91.92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल 85.81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। ईरान युद्ध के दौरान नाकेबंदी के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने को लेकर स्पष्ट संकेत न मिलने से जहाजरानी की रफ्तार भी धीमी रही। हाजिर सोना 0.6 प्रतिशत गिरकर 4,492.56 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
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