उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में स्थिरता आती है, तो मध्यम से दीर्घ अवधि में भारत के तेल आयात मिश्रण में रियायती वेनेजुएलाई कच्चे तेल की कुछ मात्रा शामिल हो सकती है। इससे भारत की अत्याधुनिक और जटिल रिफाइनरियों को लाभ मिलने की संभावना है, हालांकि निकट भविष्य में इसका कोई बड़ा या तात्कालिक असर होने की उम्मीद बेहद कम मानी जा रही है।
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन इसके बावजूद वैश्विक तेल उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से भी कम है। वर्षों से आर्थिक संकट, प्रतिबंधों और जर्जर बुनियादी ढांचे के कारण देश का तेल उद्योग बुरी तरह प्रभावित रहा है।
शनिवार को अमेरिकी बलों द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि वाशिंगटन वेनेजुएला के तेल क्षेत्र का नियंत्रण अपने हाथ में लेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी तेल कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश कर वेनेजुएला के कमजोर पड़ चुके तेल उद्योग को पुनर्जीवित करेंगी और उसकी टूटी हुई तेल अवसंरचना को दुरुस्त करेगी।
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ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन बढ़ता है और निर्यात सुचारु होता है, तो वेनेजुएला का भारी और रियायती कच्चा तेल भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं के लिए आकर्षक विकल्प बन सकता है। भारत की कई रिफाइनरियां ऐसे भारी और कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं, जिससे उन्हें लागत के स्तर पर फायदा मिल सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात, प्रतिबंधों की अनिश्चितता और तेल क्षेत्र के पुनर्निर्माण में लगने वाले समय को देखते हुए, इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा। वास्तविक लाभ तभी संभव है जब वेनेजुएला का उत्पादन और निर्यात लंबे समय तक स्थिर और विश्वसनीय बना रहे।
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