भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक सहित तीन अहम बिल पेश किए हैं। इन विधेयकों को लेकर लोकसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला, जहां विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह कदम संघीय ढांचे के खिलाफ है और इससे दक्षिण भारत को नुकसान हो सकता है।
परिसीमन विधेयक 2026 के तहत नई जनसंख्या के आधार पर संसदीय सीटों का पुनर्निर्धारण प्रस्तावित है। इससे लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर लगभग 850 हो सकती हैं। वहीं महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना है। इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 भी इन बदलावों के अनुरूप कानूनी ढांचा तैयार करेगा।
इन विधेयकों पर लोकसभा में शुक्रवार शाम 4 बजे मतदान होना है। यदि ये पारित होते हैं, तो इन्हें 2029 से लागू किया जाएगा।
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लोकसभा में वर्तमान में 540 सदस्य हैं और किसी भी विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 360 सांसदों का समर्थन जरूरी है। एनडीए के पास करीब 293 सांसद हैं, जो बहुमत से कम है। वहीं विपक्ष के पास 230 से अधिक सांसद हैं, जिनमें समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके प्रमुख हैं।
ऐसी स्थिति में सरकार को बिल पास कराने के लिए अन्य दलों का समर्थन या विपक्ष के कुछ सदस्यों के मतदान से दूरी (अनुपस्थिति) की जरूरत होगी। खासकर कांग्रेस, वाईएसआरसीपी, एआईएमआईएम और शिरोमणि अकाली दल जैसे दलों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
राज्यसभा में एनडीए के पास अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति है, लेकिन अंतिम फैसला लोकसभा के मतदान पर निर्भर करेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार बिना विपक्ष के समर्थन के इन अहम विधेयकों को पारित करा पाती है।
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