अलीपिरी पडलामंडपम का वैज्ञानिक पुनरुद्धार अब एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। यह ऐतिहासिक संरचना उस पारंपरिक पैदल मार्ग की शुरुआत में स्थित है, जो भगवान वेंकटेश्वर के पहाड़ी मंदिर तक जाता है।
पुनरुद्धार के लिए स्थल से मिट्टी के नमूने एकत्र किए गए हैं और उन्हें राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) वारंगल भेजा गया है। इन नमूनों का भू-तकनीकी विश्लेषण किया जाएगा, जिससे संरचना के लिए दीर्घकालिक और स्थायी नींव का डिज़ाइन तैयार किया जा सके।
सदियों पुरानी इस संरचना में तीर्थयात्री पारंपरिक रूप से तिरुमाला मंदिर की पवित्र यात्रा शुरू करने से पहले अपनी प्रार्थना अर्पित करते हैं। हाल ही में इसे विशेषज्ञों की देखरेख और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के निरीक्षण में वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत सावधानीपूर्वक विघटित किया गया।
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इस परियोजना का उद्देश्य संरचना के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को सुरक्षित रखते हुए उसे स्थायी रूप से बहाल करना है। भू-तकनीकी अध्ययन और वैज्ञानिक पुनरुद्धार के इस चरण से उम्मीद है कि अलीपिरी पडलामंडपम आने वाले वर्षों तक सुरक्षित और संरक्षित रहेगा।
ASI अधिकारियों ने बताया कि इस चरण में मिट्टी की संरचना, स्थायित्व और जल निकासी जैसे पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा, ताकि पडलामंडपम की नींव मजबूत और टिकाऊ हो। विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना भारतीय पुरातत्व संरक्षण में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगी।
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