न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली को आज सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया और उन्होंने पद की शपथ ग्रहण की। इस शपथ ग्रहण के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय अपनी अधिकृत पूर्ण न्यायिक संख्या 34 पर लौट आया। शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रपति, वरिष्ठ न्यायाधीश और न्यायालय के अन्य अधिकारियों की उपस्थिति रही।
न्यायमूर्ति अराधे और न्यायमूर्ति पंचोली दोनों का न्यायिक करियर अत्यंत प्रशंसनीय रहा है। उच्च न्यायालयों में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जटिल और संवेदनशील मामलों का निपटान किया है। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव भारतीय न्यायपालिका में महत्वपूर्ण योगदान देगा और अदालत की कार्यक्षमता को बढ़ाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत में न्यायाधीशों की पूर्ण संख्या होने से लंबित मामलों के निपटान में तेजी आएगी। न्यायालय की कार्यप्रणाली अधिक संतुलित और प्रभावी होगी। इस नियुक्ति से सर्वोच्च न्यायालय की निर्णय क्षमता और न्यायिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
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शपथ ग्रहण के दौरान नए न्यायाधीशों ने संवैधानिक कर्तव्यों और न्यायपालिका के प्रति निष्ठा का संकल्प लिया। वरिष्ठ न्यायाधीशों और अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और न्यायपालिका में उनके योगदान की सराहना की।
न्यायमूर्ति अराधे और पंचोली की नियुक्ति से न केवल अदालत की निर्णय क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भारतीय न्यायपालिका की मजबूती और न्याय वितरण प्रणाली की प्रभावशीलता भी सुनिश्चित होगी।
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