अमरनाथ यात्रा 2026 को सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। 3 जुलाई से शुरू होने वाली इस पवित्र यात्रा के लिए पूरे मार्ग और आधार शिविरों पर तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, यात्रा शुरू होने से पहले अनंतनाग पुलिस की एंटी-सबोटाज टीम, बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वॉड और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने नुनवान बेस कैंप और भगवती नगर बेस कैंप में व्यापक तलाशी और सुरक्षा जांच अभियान चलाया। अधिकारियों का उद्देश्य यात्रा मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है।
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए कुल 670 कंपनियां तैनात की जा रही हैं। इसके अलावा पहली बार सेना की विशेष इकाई विकास बटालियन को भी तैनात किया गया है। पर्वतीय युद्ध में प्रशिक्षित इस बटालियन के जवान पहलगाम यात्रा मार्ग के आसपास की रणनीतिक ऊंचाइयों की निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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यात्रा की तैयारियों के तहत पुलवामा पुलिस ने आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया है। वहीं, सीआरपीएफ ने बालटाल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सहायता के लिए विशेष पर्वतीय बचाव दल भी तैयार किए हैं।
श्रीनगर स्थित अमरनाथ यात्रा ट्रांजिट कैंप में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यहां बंकर बनाए गए हैं और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे और फेस रिकग्निशन कैमरे लगाए गए हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत नजर रखी जा सके।
सुरक्षा एजेंसियां इस वर्ष आधुनिक तकनीक का भी उपयोग कर रही हैं। यात्रा मार्ग की निगरानी ड्रोन और उन्नत सीसीटीवी नेटवर्क के माध्यम से की जाएगी। फेस रिकग्निशन सिस्टम की मदद से सक्रिय आतंकियों और ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) की पहचान करने का प्रयास किया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी यात्रा की सुरक्षा और तैयारियों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, सीआरपीएफ महानिदेशक जी.पी. सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासन का कहना है कि लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस बार अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
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