अमित शाह ने मंगलवार को ममता बनर्जी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का रुख स्पष्ट है और किसी भी स्थिति में पश्चिम बंगाल की धरती पर बाबरी मस्जिद का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा।
अमित शाह ने यह बयान एक जनसभा को संबोधित करते हुए दिया, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों और कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में तुष्टिकरण की राजनीति की जा रही है और इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी और जनता की भावनाओं के साथ पार्टी मजबूती से खड़ी है। शाह ने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर हुई है और सरकार इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है।
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इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट बढ़ गई है। तृणमूल कांग्रेस (अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस) की ओर से इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए ऐसे बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण को और तेज कर सकते हैं। वहीं, भाजपा का कहना है कि वह जनता की आस्था और सांस्कृतिक भावनाओं के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।
फिलहाल इस बयान को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
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